Friday, September 19, 2014

जीव ईश्वर का ही अंश है

एक महात्मा जी ने कहा कि जीव ईश्वर का ही अंश है... जो गुण ईश्वर में हैं, वे जीव में भी मौजूद हैं....तो सुनने वालों में से एक ने पूछा, 'बाबा ! ईश्वर तो सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान है, पर जीव तो अल्पज्ञ और अल्प सामर्थ्य वाला, फिर इस भिन्नता के रहते एकता कैसी?' यह सुनकर महात्मा जी मुस्कराए.....फिर­ उन्होंने उस व्यक्ति से कहा, 'एक लोटा गंगाजल ले आओ...' वह व्यक्ति लोटे में गंगाजल जल भर लाया....फिर महात्मा जी ने उस व्यक्ति से पूछा, 'अच्छा यह बताओ कि गंगा के जल और इस लोटे के जल में कोई अंतर तो नहीं है?'

वह व्यक्ति बोला, 'बिल्कुल नहीं...' महात्मा जी ने कहा, 'देखो, सामने गंगाजल में नावें चल रही हैं.... एक नाव इस लोटे के जल में चलाओ...' यह सुनकर वह व्यक्ति भौंचका रह गया और महात्मा जी का मुंह ताकने लगा.... फिर उसने साहस करके कहा, 'बाबा लोटा तो छोटा है और इसमें थोड़ा ही जल है... इतने में भला नाव कैसे चलेगी भला ...

महात्मा जी ने गंभीर होकर कहा, 'जीव एक छोटे दायरे में सीमाबद्ध होने के कारण लोटे के जल के समान अल्पज्ञ और अशक्त बना हुआ है.... यदि यह जल फिर गंगा में लौटा दिया जाए तो उस पर नाव चलने लगेगी, इसी प्रकार यदि जीव अपनी संकीर्णता के बंधन काटकर महान बन जाए तो उसे ईश्वर जैसी सर्वज्ञता और शक्ति सहज ही प्राप्त हो सकती है....

Sunday, September 29, 2013

वैज्ञानिक भाषा हिन्दी : Scientific Language Hindi

क, ख, ग, घ, ङ- कंठव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय ध्वनि कंठ से निकलती है। एक बार बोल कर देखिये |

च, छ, ज, झ,ञ- तालव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ लालू से लगती है।
एक बार बोल कर देखिये |

ट, ठ, ड, ढ , ण- मूर्धन्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण जीभ के मूर्धा से लगने पर ही सम्भव है। एक बार बोल कर देखिये |

त, थ, द, ध, न- दंतीय कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ दांतों से लगती है। एक बार बोल कर देखिये |

प, फ, ब, भ, म,- ओष्ठ्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण ओठों के मिलने पर ही होता है। एक बार बोल कर देखिये ।

हम अपनी भाषा पर गर्व करते सही है परन्तु लोगो को इसका कारण भी बताईये |
इतनी वैज्ञानिक दुनिया की कोई भाषा नही है ।

एक मजेदार बात, संस्कृत आधारित सभी भाषाए जैसे हिंदी, बंगला, ओडिया, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम इत्यादि सभी भाषाओ में व्यंजन \\\"क से ज्ञ \\\" और स्वर \\\"अ से अः \\\" ही होता है बस उनकी लिपि और बोली अलग होती है। और पढाया भी उसी क्रम में जाता है जिस क्रम में हम हिंदी सीखते है ।
है न मजेदार!!

सभी भारतीयोकों को प्रेमपूर्वक ये एहसास दिलाये कि जो भाषा वो बोलते है , वो कितनी वैज्ञानिक है ।

उनका आत्म विश्वास इतना प्रबल कर दे कि वो अंग्रेजी बोलने वाले के सामने कभी भी खुद को छोटा न समझे |

उनका आत्म विश्वास इतना प्रबल कर दे कि आईंदा से वो अंग्रेजी में गिटिर -पिटिर करने वाले को लाड साहेब न समझे ।

आइए, भाषा की मानसिक गुलामी से औरो को भी मुक्त होने में सहायता करें |